मेरे यहाँ एक नया नया मन्दिर खुला है,
नाम हालांकि प्राचीन रखा है।
लालची लोग आएं जल्दी – जल्दी
मन्दिर को प्राचीन बनाये जल्दी – जल्दी
इसलिए भंडारा सुबह-शाम चला रखा है।

लालची लोग जाते हैं कुछ मांगने
और देकर आ जाते हैं यह भी नहीं
विचारते जिससे खुद मांगने जा रहे हैं
उसे भला क्या दे सकते हैं, और यदि उसे
दे सकते हैं तो उससे मांगना कैसा ?

जरा सी अफवाह उड़ी नहीं कि ,
निकल पड़ते ईश्वर व अल्लाह को बचाने !
भूल जाते की हैं कि जब स्वयं पड़े होते हैं
किसी मुसीबत में तब आता है याद आते
हैं… अल्लाह औ ईश्वर ।

जब आप ईश्वर औ अल्लाह को खुद से
अधिक समझदार , अधिक बलवान औ
सर्वशक्तिमान मानते हैं।
तो फिर वह स्वयं की रक्षा के लिये
क्यों आप लोगों बुलायेगा ?

आप जरा विचार कीजिए जब ईश्वर
व अल्लाह की नजरों में सब समान हैं।
सभी उसके बन्दे हैं तो आप लोगों के
आपसी बैर से उसे क्या लाभ , लाभ होता है
कुछ बड़े लोगों का, राजनीतिक पार्टियों का…।

…धर्मवीर (दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं)
हमारे सम्मानित रचनाकार का दावा है कि यह उनकी स्वरचित रचना है

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