आपको चाहना
आपको चाहना ।
मेरी आदतों का पुलिंदा बन गया।
जब सोचा छोड़ दूँगा तुम्हे।
वही शाम मेरी शहादत का रहनुमा बन गया।
अब बता ऐ खुदा!
किसने बनाई ऐसी कुदरत?
क्योंकि मेरी एक-एक साँस।
उसका नपा-तुला तराजू बन गया।
लेकिन एक तो जबरजस्त बात है उसमें।
जब-जब सोचा।
वो दिन ही शमाँ से बंध गया।
न जाने क्यों।
आपको चाहना।
मेरी आदतों का पुलिंदा बन गया।
..अंकित चौरसिया (रिसर्च स्कॉलर)

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