हौसलों की उड़ान 
आशाओं का सफर
चलेगा अब तो  
यूँ ही  उम्र भर 

मंज़िले धुंधली नज़र आये,
कोई गम नहीं
साथ कोई नज़र न  आये
कोई डर नहीं
रास्ते के निशा मीट जाये
फिर भी आँखे नम नहीं

उम्मीदें कभी  न टूटेंगी
मंजिले कभी न रूठेंगी

हार जीत हमें स्वीकार होगी
जीत की फिर से तलाश होगी
                            ………सुरभि वशिष्ठ(युवा रचनाकार हैं)

हमारे सम्मानित रचनाकार का दावा है कि यह उनकी स्वरचित रचना है।

5 thoughts on “उम्र भर

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