तेरे हुस्न ए जहाँ याद करू 
या लिखू अपने तन्हाई के पल 
तेरे इश्क ए मुहब्बत का दिदार लिखू 
या लिखू अपनी नादानियो पर गज़ल 
तू अपना बता तुझे क्या याद है ,
और तेरी फरियाद क्या है 
मुझे क्या , 
कहो तो मै लिख दू हर एक बात 
तेरी धडकनों का माप लिखू 
लिख दू तेरे दिले जज्बात 
तेरी- मेरी नजरे एक साथ लिखू 
या शाम- ए अस्सी घाट॥ 

कहो तो तेरे दिए खट्टे –मिठे सौगात लिखू 
अपने दिल की सच्ची मुराद लिख दूँ  
कहो तो इश्क बरबाद लिख दूँ  ,
और कहानियाँ दिल –ए आबाद भी लिख दूँ ॥
रुको ! थोड़ी देर और ठहर जाओ !!
मै चाहता हूँ अपने दिल की हर राज लिख दूँ 
और इस दुनिया ए जहाँ बरबाद लिख दूँ 
कहो तो इसको नाचीज ,नामुरिद लिख दूँ 
इसका मिटा हुआ वजूद लिख दूँ ॥ 
…सुचित कुमार यादव(दिल्ली विश्वविद्यालय में पीएचडी स्कॉलर है 
और हिन्दू कॉलेज में राजनितिक विज्ञान पढ़ाते है)
हमारे सम्मानित रचनाकार का दावा है यह उनकी स्वरचित रचना है
# अस्सी घाट ,बनारस में गंगा नदी के किनारे बसाया गया प्रसिद्ध घाट है ॥

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