डॉ पायल तड़वी का गुनाह क्या था..?
यही की वह महाराष्ट्र के #आदिवासी परिवार से थी। नेशनल मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट (एम.डी.) की  पढाई कर रही थी..!!

कॉलेज की कुछ सीनियर, तुच्छ मगजी सवर्ण महिलाओ ने…
जाति के नाम पर डॉ पायल तड़वी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। व्हाटसअप ग्रुप में उसकी जाति को लेकर मजाक उड़ाया जाने लगा। रंग-ढ़ंग को लेकर मजाक बनाया जाने लगा। लैब में उसे काम करने से रोका जाने लगा। भरी क्लास मे जातिवादी गालियां दी जाने लगीं। उसकी योग्यता पर सवाल किया जाने लगे। उसके छूने से मरीजो के अशुद्ध हो जाने की बात की जाने लगी। उसके #आदिवासी होने ने उसे जंगली की श्रेणी में रख दिया। खाने की टेबल पर उसे इन जातिवादी इलीट महिलाओं ने गॉशिप पॉइंट बना दिया। इन तुच्छ मगजी महिलाओं से डॉ पायल का आगे बढ़ना सहन नहीं हुआ।

जब टॉर्चर बढ़ने लगा तब कॉलेज प्रशासन से इसकी दो बार (दिसंबर 2018 और 10 मई 2019)माँ बाबा के साथ मिलकर लिखित शिकायत भी दर्ज करा दी गई। लेकिन इन 6 महिनो मे कोई कार्यवाही नही की गई..??
21मई 2019 को डॉ पायल पड़वी ने अपनी माँ को फोन किया और बताया कि ये टॉर्चर अब और बर्दास्त नही होता है। अगले दिन डॉ पायल तड़वी अपने पेसेंट की #सफल_सर्जरी के बाद लंच के लिए हॉस्टल आयी और अपने रूम में अपने ही दुपट्टे से फांसी लगा ली। 

अब सवाल ये है डॉ पायल तड़वी की संस्थानिक हत्या के लिए जिम्मेदार कौन है ? 

उसका आदिवासी होना ??
या हिन्दु समाज का घोर जातिवादी होना ??
JusticeForDrPayalTadvi
इसे कहते है #घोरजातिवाद
…विनीत कुमार


साथियों, पहली फोटो में आप एक हँसती खिलखिलाती हुई लड़की देख रहे है लेकिन अगली फोटो फ्रेम में जड़ी हुई है और उसके ऊपर माला चढ़ा दी गई है मोमबत्तियां जल रही है। बाकि की दो फोटो में लड़की अपनी माँ और बाबा है।

दरअसल ये फोटो डॉ पायल तड़वी की है जो की महाराष्ट्र के जलगाँव जिले के आदिवासी परिवार से थी वर्तमान में वी वाई एल नायर हॉस्पिटल से संबद्ध टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज के गायनोकॉलॉजी विभाग में पोस्ट ग्रेजुएट (एम.डी.) कोर्स में द्वितीय वर्ष की अपनी पढाई कर रही थी और यही इसका गुनाह था। 

पिछले वर्ष एडमिशन में उसे आरक्षण का लाभ मिला था लेकिन यह संविधान प्रदत्त अधिकार उसी कॉलेज की कुछ सीनियर सवर्ण इलीट महिलाओं जिनमे डॉ हेमा आहूजा, डॉ अंकिता खंडेलवाल और डॉ भक्ति महर को पसंद नही आया और जाति के नाम पर डॉ पायल तड़वी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और व्हाटसअप ग्रुप में उसकी जाति को लेकर मजाक उड़ाया जाने लगा, उसकी लैब में उसे काम करने से रोका जाने लगा, उसकी योग्यता पर सवाल किया जाने लगा, उसके इलाज से मरीजो के अशुद्ध हो जाने की बात की जाने लगी, उसके आदिवासी होने ने उसे जंगली की श्रेणी में रख दिया, खाने की टेबल पर उसे इस तीनो सवर्ण इलीट महिलाओं ने गॉशिप पॉइंट बना दिया।

टॉर्चर जब ज्यादा बढ़ने लगा तब उसने अपनी माँ जो की एक कैंसर पेसेंट है और उसी हॉस्पिटल में इलाज कराने आती है को ये बात बताई तो दोनों माँ बेटी ने कॉलेज के अधिकारियों को इसकी शिकायत दिसंबर 2018 में ही की थी लेकिन किसी ने उनकी शिकायत पर ध्यान नही दिया। इन सवर्ण इलीट महिलाओं का टॉर्चर दिनों दिन बढ़ता गया तो 10 मई 2019 को माँ बाबा के साथ मिलकर लिखित शिकायत भी दर्ज करा दी गई लेकिन कोई कार्यवाही नही की गई।

21 मई 2019 को डॉ पायल पड़वी ने अपनी माँ को फोन किया और बताया कि ये टॉर्चर अब और बर्दास्त नही होता है तो घरवालों ने अगले दिन हॉस्पिटल आने की बात कही। अगले दिन 22 मई 2019 को डॉ पायल तड़वी अपने पेसेंट की सफल सर्जरी के बाद लंच के ले लिए हॉस्टल आयी और अपने रूम में अपने ही दुपट्टे से फांसी लगा ली। 

अब सवाल ये है डॉ पायल तड़वी की संस्थानिक हत्या के लिए जिम्मेदार कौन है ? 

1 उसका आदिवासी होना ?
2 एक आदिवासी लड़की का सवर्णो के वर्चस्व वाले डॉक्टर जैसे पेशे को अपनाना ?
3 आरक्षण के संबैधानिक अधिकार का उपयोग करना ? 

ये तमाम कारण डॉ पायल तड़वी की संस्थानिक हत्या के कारण है। 

आखिर क्यों इन तीनो सवर्ण महिलाओं हेमा आहूजा, अंकिता खंडेलवाल, भक्ति महर (डॉ जैसा शब्द इनके लिए उपयुक्त नही है) महिलाओं के खिलाफ कोई भी कार्यवाही पिछले 6 महीने में क्यों नही की गई ? क्योकि वे सवर्ण इलीट थी ? 

क्यों नही विभाग या कॉलेज के अधिकारियों ने इस जातिगत टॉर्चर के खिलाफ कार्यवाही की ? क्योकि जाति का नाम आते ही कॉलेज बदनाम हो सकता था। 

क्यों डॉ पायल तड़वी के माँ और पिताजी की शिकायत पर ध्यान दिया गया ? क्योकि आदिवासी थे और उनकी कोई औकात नही थी।

अब इस घटना के चार दिन बाद भी तीनो सवर्ण इलीट महिलाओं को गिरफ्तार नही किया गया है और कार्यवाही के नाम पर डॉ तड़वी की यूनिट हेड डॉ यी चिंग लिंग और  विभाग के हेड डॉ एस डी शिरोडकर को पद से हटा दिया गया है मतलब बलि का बकरा कॉलेज प्रशासन को मिल गया है लेकिन अभी तक इन तीनो महिलाओं के खिलाफ कोई कार्यवाही पुलिस ने नहीं की है यहां तक की ये तीनो महिलाएं फरार है और मामले को कॉलेज प्रशासन रैगिंग का मसला बनाने में जुटा हुआ है।

जानता हूँ की पुलिसिया कार्यवाही का कोई परिणाम नही निकलेगा और न ही उसके न्याय के लिए लोग सड़क पर आएंगे लेकिन क्या हम लोग भी ऐसी ही एक आदिवासी डॉक्टर की संस्थानिक हत्या को ऐसे ही भुला देंगे तो मेरा जबाब है नही। जब तक तीनो सवर्ण महिलाओं को गिरफ्तार करके जेल नही भेज दिया जाता और कॉलेज को दण्डित नही किया जाता हम लोग चुप नही बैठेंगे।

आज शाम तक आगे एक्शन की सूचना आपको दी जायेगी

#JusticeForDrPayalTadvi

Laxman Yadav गंगा सहाय मीणा Neetisha Xalxo Atul Kumar Valentina Aud N Sai Balaji Sucheta De Nandita Narain Rajib Ray Gyan Prakash Suchit Santosh Sukumar Narayana Rajesh Paswan डॉ पी. आर. मीणा Sachin Nirmala Narayanan Naveen Gaur Raj Vasava Praful Vasava छोटुभाई वसावा 
      …जितेंद्र पृथ्वी


4 thoughts on “डॉ पायल तड़वी का गुनाह क्या था..?

  1. बेहद अफसोसजनक, जाति के नाम पर कोई भेदभाव संविधान के खिलाफ है

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