हाँ मैंने रोया बहुत, तुम्हारे जाने के बाद 
कई रात नहीं सोया, तुम्हारे जाने के बाद 
हमने बहुत कुछ खोया तुम्हारे जाने के बाद
बड़ी मुश्किलों से खुद को संजोया, तुम्हारे जाने के बाद 
सब कुछ बहुत याद आता है, तुम्हारे जाने के बाद ॥

    मैं जो तुमसे कहा करता था –
एक इबादत है तू, मैं तेरी अदायगी करता हूँ
जुलम तो आदत है दुनिया की, मैं तेरी हिफ़ाज़त करता हूँ 
चलो बहुत दूर और दूर, एक नई दुनिया इजाद करें 
वहा बैठे, दिल का हर दर्द तुमसे फरियाद करे 
सब कुछ बहुत याद आता है, तुम्हारे जाने के बाद ॥

याद है, मैं जो कहा करता था—
तेरे अंदाज़-ए- बया में मेरी आँखे बहक जाती हैं  
और तू है कि मेरी हर सुलझन में उलझ जाती है 
गौर से देख, ये अंजाम-ए- इन्तज़ार क्या होगा 
तुम-तुम होगी ,मैं-मैं होऊँगा और एक फ़लसफ़ा होगा 
मेरे मुस्कान से, तेरी हँसी शान से एक खनक आती है 
तेरे न होने से मेरी आखे, आनायास छलक जाती हैं ।
सब कुछ बहुत याद आता है, तुम्हारे जाने के बाद ॥
…सुचित कुमार यादव (दिल्ली विश्वविद्यालय में पीएचडी स्कॉलर हैं,
और हिन्दू कॉलेज में राजनितिक विज्ञान पढ़ाते है)
 

हमारे सम्मानित रचनाकार का दावा है कि यह उनकी स्वरचित रचना है।

3 thoughts on “तुम्हारे जाने के बाद —-

  1. "हमने बहुत कुछ खोया,तुम्हारे जाने के बाद
    बड़ी मुश्किलों से खुद को संजोया है,तुम्हारे जाने के बाद;"
    -बेहद भावपूर्ण रचना है सुचित जी 👌

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