राम जी का देव देखो
कैसा है ये मेव देखो
हाशिये पर आने को…
बेके यहां महा देव देखो

संस का होता कार में लेखो
भाजत फिरें वो पा ओ देखो
राज की नीति अपनाने को…
जि दियो यहाँ को सब लेखो

ब सभी सपा कर जाए देखो
वो कान में ग्रीस लगाए देखो
बे रोज घरी निहारन को…
यहाँ बढ़े रोज ये लगान देखो

जन भी था है कंगाल देखो
न था फैंकता जाल देखो
घु बढ़ी टन शहादत को..
मरता इन्सा है किसान देखो

सभ्य के ये तार देखो
हुए जार जार देखो
अपनी बहु शक्ति बढ़ाने को
सन और कृति गयी हार देखो

आर की वो सास देखो
भी रमी घर बार देखो
देखो इसके उद्देश्य को..
ये है जनता की हार देखो
…पवन कुमार(दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं)
कविता में लय गाने की है…और इस कविता के शब्द प्रतीकात्मक हैं जिसमें शब्दों को अलग अलग कर उनका अर्थ बदल दिया गया है।
राम जी का देव = रामदेव
संस का होता कार = संस्कार
भाजत फिरें वो पा = भाजपा
राज की नीति = राजनीति
जि दियो =जियो
ब सभी सपा = सपा,बसपा
कान में ग्रीस = कांग्रेस
बे रोज घरी = बेरोजगारी
जन भी था = जनता
घु बढ़ी टन = घुटन
सभ्य के ये तार =सभ्यता
सन और कृति = संस्कृति
आर की वो सास = आर.एस. एस
भी रमी =भीम आर्मी
हमारे सम्मानित रचनाकार का दावा है कि यह उनकी स्वरचित रचना है।

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