बीती यादों को लेकर
बीती यादों को लेकर ही मत जियो मरो..
आगे और भी लोग आएंगे..
जिन पर तुम्हारा दिल आएगा
जो बीत गयी सो बात गयी 
अब बात कुछ करो नई
पुराने में रखा क्या है 
अपना तो हर पल नया है 

जो सामने है उसे स्वीकार करो 
जो चला गया उसे मत याद करो 
यादों में रखा क्या है 
आने वाला हर पल नया है 

जो भाव खाये उसे त्याग दो 
जो प्यार दे उसे प्यार दो 
आखिर इन लोगो मे रखा क्या है 
सभी लोगो मे कुछ नया है 

अच्छी और बुरी दोनो परिस्थितियां आगे आएंगी 
खुशियों के साथ दुखो को भी साथ लाएंगी 
ज़िंदगी का नाम ही ‘आगे बढ़ना’ है 
रुकना नही कभी , तेरा काम ‘चलना’ है 
उस पल को स्वीकार कर ,जो तेरे लिए नया है 
 ..ज्योति कुमारी ( दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा हैं )

हमारे सम्मानित रचनाकार का दावा है कि यह उनकी स्वरचित रचना है।

3 thoughts on “बीती यादों को लेकर

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