दे गये हमको
वो वीरता की कहानी,
जिन्होंने देश के नाम
कर दी अपनी जवानी।

अपने खून से
देश को सींचा था,
दुश्मनों की आवाज़ को
वीरों ने मींसा था।

कदमों से कदम मिलाये थे
सबने गीत प्रेम के गाये थे,
ये अमर कहानियां हैं जग में
कांटे थे उनके पग – पग में।

था लक्ष्य आपका स्वदेशी
हम आज भी आप पर गर्व करें,
दुश्मनों से अब
हम भी ना डरें।

कोई भी भरता हो अपनी जेब
मगर हम बांटते हैं देश प्रेम
यदि इन राहों पर
पवन भी चल पाए
तो देश प्रेम में मधु लाए।
…पवन कुमार(दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं)
हमारे सम्मानित रचनाकार का दावा है कि यह उनकी स्वरचित रचना है

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