जो है यह हाल
तो आगे क्या होगा,
बनी स्पात की दुनियां
यहां मनुष्य का क्या होगा।

खो दिया सब आज यहां
ना जाने आगे क्या होगा,
देखि यह दहल जातु है दिल
यहां मनुष्यता का क्या होगा।

संवेदनहीन बने हैं सब
इस अचला का क्या होगा,
पवन सी पवन ना रही अब
आखिरी सांस का क्या होगा।

सुधर लो समय कम बचा है
ना जाने आगे क्या होगा,
हश्र हालत सा होगा अब
पिरोये धागे में भोगा।।

..पवन कुमार(दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं)
हमारे सम्मानित रचनाकार का दावा है कि यह उनकी स्वरचिय रचना है

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