डॉ पायल तड़वी का गुनाह क्या था..?

यही की वह महाराष्ट्र के #आदिवासी परिवार से थी। नेशनल मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट (एम.डी.) की  पढाई कर रही थी..!!कॉलेज की कुछ सीनियर, तुच्छ मगजी सवर्ण महिलाओ ने…जाति के नाम पर डॉ पायल तड़वी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। व्हाटसअप ग्रुप में उसकी जाति को लेकर मजाक उड़ाया

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गुलामी का दौर एकदम नहीं आया था भारत में…

गुलामी का दौर एकदम नहीं आया था भारत में…समय के साथ उसकी सीमा बढ़ती गयी जिससे देश को गुलामी जैसी जकड़न से गुजरना पड़ा। भारत में ईस्टइंडिया कंपनी का आगमन हुआ जो भारतवासियों का विश्वास जीतने में सफल रही थी। यही कारण था कि भारत जैसे प्रबुद्ध देश पर ईस्टइंडिया

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राजनीति के परिदृश्य में मुस्लिम युवा

          आज का मुस्लिम समाज जिनमें से खासकर युवा वर्ग अराजक तत्वों से डरा, सहमा और व्यथित दिखाई देता है। और इसका कारण भी है, आज देश में ऐसा माहौल उत्पन्न कर दिया है कि जिसके चलते यह युवा अपना आतीत तक नहीं खोज पाता। इनकी संभावनों को इस कदर

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भारत बंद

मुल्क की आम आवाम के नाम पैगामक्यों हो रहा है 5 मार्च को भारत बंद——————————————————-साथियो!आज मुल्क एक ऐसे मोड पर खड़ा है कि यहाँ की जनता को अपने हक़-हुकूक के लिए सड़क पर उतर कर भारत बंद करने को मजबूर होना पड़ रहा है। आपके मन में एक सवाल आ

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राजनीति और मीडिया के बदलते संदर्भ

समझ नहीं आता कि किस मिट्टी से बने हैं लोग। लोग से तातपर्य समझ ही गये होंगे कि मैं किसकी बात कर रहा हूँ, और अगर नहीं समझे होंगे तो फोटो और नाम से समझ गए होंगे।ख़ैर, देश में चारों तरफ तूफान सा है, सेना के 40(कुछ तथ्यों के अनुसार)

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आधार

कुछ लोग कहते हैं कि बुराई को खत्म कर देना चाहिए…यदि ऐसा हुआ कि बुराई ख़तम हो गयी तो समाज स्थिर हो जाएगा, समाज में विकास होना संभव न होगा…बुराई समाज वैसा ही कार्य करती है जैसे #चोर_पुलिस । एक अपनी आजीविका के लिए गलत रास्ता चुनता है तो दूसरा

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हिंदी की दिशा और दशा

     ऐसा नहीं है कि हिंदी भाषा को लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर पर लोगों में रुचि नहीं है, है लेकिन हम समझ नही पाते कि हिंदी भाषा को किस तरह निखार देना चाहिए… इसी विषय पर एक दफ़ा मेरे साथ भी कुछ यूं बारदात हुई कि “मैं और मेरे कुछ करीबी

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मी टू अभिशाप या वरदान

मैं मी_टू  या यू_टू तो नहीं जानती लेकिन यह जरूर जानती हूँ कि स्त्रियों की आवाज को सदियों से दबाया जरूर जाता रहा है,यदि स्त्रियों के साथ कभी कुछ गलत हुआ तो अव्वल तो परिवार ही उसे चुप रहने को मना कर देता है और यदि वो परिवार को किसी

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एक अविभाजित भारत

एक अविभाजित भारत का नक्शा है। दूसरा उसके एक घुसपैठिए का।आज पार्टीशन आर्काइव की चित्र प्रदर्शनी का आख़िरी दिन था। उस नक्शे पर तमाम विस्थापित परिवारों ने अपनी हिज़रत के रस्ते अंकित कर दिए हैं। वैसे यह प्रदर्शनी दिल्ली पर थी। एक समृद्ध कॉस्मोपोलिटन सभ्यता केंद्र के शरणार्थी शहर में

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स्वतंत्रता…

स्वतंत्रता सभी व्यक्तियो के लिए इसके माएने अलग – अलग होते है | लंबे संघर्ष के बाद जब स्वतंत्रता प्राप्त हुई तब इसका तात्पर्य केवल शारीरिक-आर्थिक शोषण से मुक्ति नहीं था बल्की उन सभी सामाजिक व मानसिक पीडा व भेदभाव से मुक्ति प्राप्त करना था जो भारतीय समाज को खोखला

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