तुम्हारे जाने के बाद —-

हाँ मैंने रोया बहुत, तुम्हारे जाने के बाद  कई रात नहीं सोया, तुम्हारे जाने के बाद  हमने बहुत कुछ खोया तुम्हारे जाने के बाद बड़ी मुश्किलों से खुद को संजोया, तुम्हारे जाने के बाद  सब कुछ बहुत याद आता है, तुम्हारे जाने के बाद ॥     मैं जो तुमसे

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हर पल तुम्हें याद करती हूँ…

हर पल तुम्हें याद करती हूँ,  क्यौं तुमसे इतना प्यार करती हूँ।  तुम दर्द इतना देते हो,   हर साँस में मुझको  फिर क्यों ये जिंदगी ,  मैं तुम्हारे नाम करती हूँ।  तुम काला साया हो,  मैं धूप हूँ सुबह की फिर क्यों तुम्हारी कालिमा में , खुद मैं ढलती हूँ। 

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गुलामी का दौर एकदम नहीं आया था भारत में…

गुलामी का दौर एकदम नहीं आया था भारत में…समय के साथ उसकी सीमा बढ़ती गयी जिससे देश को गुलामी जैसी जकड़न से गुजरना पड़ा। भारत में ईस्टइंडिया कंपनी का आगमन हुआ जो भारतवासियों का विश्वास जीतने में सफल रही थी। यही कारण था कि भारत जैसे प्रबुद्ध देश पर ईस्टइंडिया

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आपको चाहना

आपको चाहना । मेरी आदतों का पुलिंदा बन गया। जब सोचा छोड़ दूँगा तुम्हे। वही शाम मेरी शहादत का रहनुमा बन गया। अब बता ऐ खुदा! किसने बनाई ऐसी कुदरत? क्योंकि मेरी एक-एक साँस। उसका नपा-तुला तराजू बन गया। लेकिन एक तो जबरजस्त बात है उसमें। जब-जब सोचा। वो दिन

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मेरे पिता

मेरे पिता ने मुझे जिंदगी में  सबसे बड़ा तोहफा दिया,  उन्होंने मुझ में यकीन किया, मेरे पिता ने पंख दिए उड़ने के लिए, मां ने मुझे उडने का मौका दिया एक हौसले से भरी जिंदगी, और जीने का अवसर दिया   तेरा यूं कहना हौसला बुलंद रख  मंजिल मिल ही जाएगी

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माँ की ममता

माँ की ममताकई सलतनतें रही होंगी,पर कोई मां सा न रहा होगा बाहों मे तो बहुतो ने लिया है,पर गोद में तो मां ने ही लिया होगा खाना तो बाहर भी मिलता है,पर प्यार मिलाकर खाना मां ने ही बनाया होगा फिकी चीजें भी जब मिठी हो जाती थी,वो छू

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राजनीति और लोकतंत्र।

जब हुआ मतदान। खूब बाँटा गया। दारू और राशन-दान। देश की जनता। समझ वैठी। यही है। राजनीति का। अमूल्य-दान। लेकिन। भईया जब वैठे। गद्दी पर। वही राशन-दान। बन गया। बिलकुल विषपान। क्योंकि अब हुआ। अपना-अपना। राम-राम। लेकिन। इसका क्या हो। समाधान। इसलिए। भारतीय राजनीतिक पार्टियों को। अंकित चौरसिया का प्रणाम।🙏

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कब संम्भव…

हर चाँद में वों मंजर ही हो हर प्रेमी उसे कुछ यूँ झाँके हर वक्त रहे चाँदनी सफर यह कब संम्भव , यह कब संम्भव ॥  हर रोज जेहन में आये तूं बस मीठा ही मुस्काये तूं हर प्यार भरी नजरे तेरी कुछ चुपके से कह जायें यूँ हर बात

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स्पात की

जो है यह हालतो आगे क्या होगा,बनी स्पात की दुनियांयहां मनुष्य का क्या होगा। खो दिया सब आज यहांना जाने आगे क्या होगा,देखि यह दहल जातु है दिलयहां मनुष्यता का क्या होगा। संवेदनहीन बने हैं सबइस अचला का क्या होगा,पवन सी पवन ना रही अबआखिरी सांस का क्या होगा। सुधर

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टेम्पो चालक

देखा मैंने एक टेम्पो चालकथा गंध भरा अच्छा था लुक,वह बात देशभक्ति की करेन जिये ज़िन्दगी न है मरे। वह नंगे पैरों था बैठाहर बात में रहता था ऐंठा,थी विबाइयाँ उसकीजो करे बात मीठी मीठी। आज पढ़े लिखे है देशभक्तवह करें प्रेम,हैं प्रेम भक्त,वह दिन भर रोज़ कमाता थादो-चार रोटियां

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