बुधवार, 4 सितंबर 2019

आखिर कब तक

आखिर कब तक
मुझे यूं ही नफरत करोगे।
मिट्टी में मिलने के बाद तो
एक दिन तुम याद करोगे।


आखिर कब तक
अपने दिल की धड़कनों से
मुझे दूर करोगे।
सांसे रुक जाने के बाद तो
अपनी धड़कनों में तो
एक दिन मुझे सुनोगे।


आखिर कब तक
मेरे दर्द पर मुस्कुराओ गए।
बेदर्द दुनिया से दर्द मिलने पर
एक दिन तो मुझे
याद कर तुम पछताओगे।


आखिर कब तक
मेरे खिलाफ औरों से
तुम गुफ्तगू करोगे।
एक दिन तो रो-रो कर
आहें भर मुझे याद करोगे।


राजीव डोगरा (युवा कवि लेखक,भाषा अध्यापक)