बुधवार, 4 सितंबर 2019

राजनीति और लोकतंत्र

जब हुआ मतदान।
खूब बाँटा गया।
दारू और राशन-दान।


देश की जनता।
समझ वैठी।
यही है।
राजनीति का।
अमूल्य-दान।


लेकिन।
भईया जब वैठे।
गद्दी पर।
वही राशन-दान।


बन गया।
बिलकुल विषपान।
क्योंकि अब हुआ।
अपना-अपना।
राम-राम।


लेकिन।
इसका क्या हो।
समाधान।


इसलिए।
भारतीय राजनीतिक पार्टियों को।
अंकित चौरसिया का प्रणाम।🙏


डॉ. अंकित चौरसिया(दिल्ली विश्वविद्यालय)