मंगलवार, 10 सितंबर 2019

समय हूँ

समय हूँ,समय हूँ मैं
मंजिल का मूल्यवान् हूँ।


जरा इस बात पर ध्यान दो मेरा-
तेरे जीवन की अनोखी क़ीमत हूँ ,
मोती से ऊपर मूल्य है मेरा
बड़ा बलवान हूँ ,
बड़ा  धनवान हूँ।


न मेरा कोई सजीव तन है
न मेरा अपना मन है
न मुझें आराम है
न किसी का प्रतिक्षा है
सिर्फ टिक-टिक कर-
मैं चलता हूँ।
जो इंसान मुझें
बेवफ़ा समझता है
इक-उम्र के बाद व
बहुत पछ्ताता है।


हाँ मैं समय हूँ
इसलिए इंसान की
निरंतर साथ हूँ।
मुझें सब महत्व देते हैं
चाहे धनी हों या निर्धन ,
चाहे चोर हों या धर्मनिष्ट ,
चाहे मजदूर हों या सैनिक।


जरा-सी मेरी-
क़ीमत में इंसान
मंजिल लेती है
प्राण खो देता है ,
मेरी कहानी अजब-सी है
समय हूँ, समय हूँ मैं
मंजिल का मूल्यवान् हूँ।


अनुरंजन कुमार "अँचल"
जिला -:अररिया ,बिहार