शनिवार, 7 सितंबर 2019

नया कानून

497 लो जी स्वागत कर लो
आ गया है नया कानून
जहाँ नर, नारी स्वच्छद भाव से
पूरा कर सकेंगे मन का जूनून
नारी परपुरूष को गले लगा सकती है
तो पुरूष भी लेकर परनारी का सहारा
कर सकता है पत्नी, परिवार से किनारा
दोनों मनायेंगे रंगरलियां, परिवार को छोडकर मंझधारा
नैतिकता को छोडकर
खुला होगा व्यभिचार
दैहिक सम्बन्धों के सामने
खडा रोयेगा परिवार
कुछ सोचकर थोडी कल्पना कीजिये
सोच, समझ कर ही फैसला दिजिये
बडे, बुजुर्गों, परिवार के रिश्तों
बच्चों, को भी एक नजर सोचिये
हमारी परिवार की शर्मोहया,
संस्कार, हँसी और ख़ुशी
सब बदल जायेंगे मातम में,
सबको मिलेंगे गम, और दुखी
हमारी भारतीय सोच तो हमेशा से
घर को मन्दिर बनाने की रही है
माँ, बहन, बेटी, पत्नि सारे रिश्तों में
अपनेपन की महक रही है
ऐसी खुली छूट के हमारे
जीवन पर दूरगामी परिणाम होंगें
परिवार टूटेंगे,भावनात्मक, रूप से भी
पति, पत्नि भी अलगाव भोगेंगे
थका हारा नर जब शाम को
परिवार की ठंडी छाँव तले आता है
पत्नि, बच्चे, परिवार में सभी को
हँसते, मुस्कुराते देख जन्नत का सुख पाता है
हमारे सनातन धर्म की विशेषता
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते
रमन्ते तत्र देवता रही है
ये पाश्चात्य संस्कृति हमारी जडों को
खोखला करने का काम कर रही है
एक विदेशी जोसेफ की याचिका पर
कानून भारत के रिश्तों को बदल देता है
और भारतीय मर्यादा, संस्कृति
को ताक पर रख देता है
हर एक रिश्ता इक मर्यादा
में ही पनप सकता है औ, ये रिश्ता
स्नेह, प्रेम, आदर, सम्मान की
मजबूत नींव पर ही चलता है
नारी को विचारों को अभिव्यक्त
करने की आजादी दीजिए
स्नेह, प्रेम, सम्मान ,गुण दीजिए
पर, यूँ उसे कुलटा बनाकर
कलंकित न कीजिये
नारी और नगरवधु में
क्या फर्क कर पाओगे
जब रिश्ते,अहसास और
जमीर ही ना जिन्दा रख पाओगे
हमारा सनातन धर्म रिश्तों की
पवित्रता को सम्मान देता है
जब बनेंगे खुले सम्बन्ध तो
फिर कौन किसको मान देता है
भारतीय समाज को भी इस
कानून के दुष्परिणाम भोगने होंगे
विदेशों की देखा ~देखी अगर
ऐसे कानून भारत में लाये जायेंगे
मेरा भारत धर्म, संस्कृति, औ,
रिश्ते जी जान से निभाता है
विदेशियों की नकल मत करो
भारतवासी अपनी आन, बान पर मरता है


सीमा गर्ग " मंजरी "