बुधवार, 4 सितंबर 2019

अब नहीं आएगा कोई

अब नहीं आएगा कोई
ज्योतिबा फूले ,
राजा राम मोहन राय ,
और नहीं आएगा कोई अम्बेडकर


क्योंकि समाज बट गया है
टुकड़े-टुकड़े टुकड़े-टुकड़े
तुमको स्वयं ही लड़नी होगी
अपनी लड़ाई , छोड़ना होगा सारा डर..


जो तुम शरमा जाती हो
देख कर किसी को अपनी ओर देखता
जो तुम चुप रह जाती हो
थोड़ी देर की ही तो बात है सोचकर


जो तुम डर जाती हो
कुछ करने से पूर्व परिणाम सोचकर
जो तुम चुप हो जाती हो
की कोई नहीं समझेगा छोड़ो जाने दो


जो तुम अपना हक छोड़ती हो
कोई बात नहीं भाई तो पढ़ रहा है ना
जो तुम समझौता करती हो
लड़की तो पराई ही होती है ये सोचकर


जो गलत को भाग्य मानती हो
पति ही तो है मार भी दिया तो क्या हुआ
जो तुम अंधविश्वास करती हो
कोई चौर जब पीछे हो तो काले डोरे को चूमने का


बदलना होगा सबसे पहले
अपने द्वारा किये जा रहे गलत कार्यों को
तब ही तुम चल पाओगी
इस मानसिक रूप से अपंग समाज से आगे


धर्म
(आलोचना और सुझावों का स्वागत है)