बुधवार, 2 अक्तूबर 2019

स्वीकार है मुझे

मुझे स्वीकार है
हां हां मैं दलित हूं
स्वीकार है मुझे, कि मैं
निम्न जाति का पाप हूं
गर्भ में तो, मैं भी पला हूं
फिर क्यों किसी का अभिशाप हूं
मुझे स्वीकार है, मेरा नीच होना
गन्दगी में जीना दूसरो का मलवा ढोना
हां हां मैं दलित हूं
अपने कर्मो से अपने धर्मों से
तुम बड़े हो ,मुझसे नही मेरी नियति से बड़े
मैं पाप हूं अभिशाप हूं ,
अपनी माँ के गर्भ का अभिशाप
मेरी पीड़ा सहनीय है,
क्योंकि में सहना जानता हूं
तुम्हारी गालियों और अत्याचारों को पहचानता हूं
जीता हूं उन गंदी बस्तियों में आज भी
जूठन खाता हूं, तुम्हारी मैं आज भी,
बस करो ये अत्याचार हमपर ,
मुझे स्वीकार है
हां हां मुझे स्वीकार है
मेरा दलित होना
मुझे स्वीकार है ।


नाम – लक्ष्मी (पीएचडी हिंदी jnu)