रविवार, 27 अक्तूबर 2019

चुनावाँ की टेम में

चुनावाँ की टेम मै भोत मजा आवीं हीं ।
ओ मजो बै दूर बैठ्या ई उठावीं हैं ।
---------
जद बेरो पड़ै कै
बसुन्दरा आरी है ।
तो,
भक्तां कै पाँख लाग्यावीं हीं ।
पूरो जोर सोर, खुमारी बै,
रेली मै उतारी हीं ।
-------
अयाँ'ई
जद बेरो पड़ै कै
गैलोत की रेली है ।
तो
लोग उफणना चालू हो ज्यावैं हीं ।
चाल ढाल सारी बदल ज्यावीं हीं ।
कइयां कै मन मै कुलबुलाट जागै,
तो
कई सारा फुफ्कारै लाग ज्यावीं हीं ।
कई सोच बिचार करै,
तो
कई उठावापटक ।
ई जोस जोस् माईं करै बै,
देखण हाला नाटक ।
-----------
समजण हालां दूर बैठ्या,
बैठ्या ईं नीगा मारीं हीं ।
कदै आतां न देखीं
कदै जातां न देखीं
ई टेम को पूरो मजो,
बैठ्या बैठ्या ईं उठावीं हीं ।
----------
----------
कांगरेस की रेली मै जाणै सै,
लोग खींहि
ओ कांगरेसी है ।
अर
भाजपा की रेली मै जाणै सै
खै कै
ओ भाजपा को है ।
पण
मैनै तो
न्यू लागै है कै,
घणकरां कै
दोन्यू कान्या'ईं हात मारीं हीं ।
----------
ई फड़फड़ाहट मै बाकै,
पाव आदपा हात आ ज्यावै है ।
जकी को तेल चोपड़ बणाय बै,
पूरी पाँच साल निकाली हीं ।
चुनावाँ को पुरो मजो बै दूर बैठ्या ई उठावै हीं
बै दूर बैठ्या ई उठावीं हीं ।
दूर बैठ्या ईं उठावीं हीं ।
-----------
-कैलाश चन्द्र 'माही'
प्राध्यापक-उदयपुर