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गुरुवार, 10 अक्तूबर 2019

बिटिया सयानी हो गई

बिटिया सयानी हो गई,

मां के बराबर हो गई है।

खोज कर अच्छा सा रिश्ता,

हाथ पीले कर दो इसके।


हो गया अब क्या होगा पढ़ के,

जाए अब वो घर बसाए।

देखे अपना घर बार अब वो,

समझे थोड़ी दुनिया दारी।


अब बात ऐसी हो रही है,

रिश्तेदारों की मीटिंग में।

बिटिया बेचारी शांत होकर,

पर्दे के पीछे से सुन रही है।


सुन के ये सब सोचती है,

देखती है एक बार खुद को।

क्या अब बदल गया है ऐसा,

क्या परिवर्तन नया हुआ है।


थी अभी तक आजाद जो वो,

कॉलेज के सपने थी सजाए।

सोचती थी जीत लेगी,

दुनिया की सारी मंजिलों को।


पर क्या पता था ,जल्द ही

पैरों में होंगी बेड़ियां।

करना होगा चौका - बर्तन,

घेर लेंगी मजबूरियां।


सुन कर सबकी बात सारी,

सपने तैर गए आंखों में।

देख कर के भविष्य अपना,

मूंद ली उसने भी आंखें।


देख कर के भविष्य अपना

मूंद ली उसने भी आंखें।


शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2019

पुलवामा

क्या होगा भयानक दृश्य वहां
वीरों ने गवाये प्राण जहां
कतरा कतरा था खून गिरा
थम गया समय ही पल में वहां


चल रहे लोग चलतीं गाड़ी
हुआ रक्त तेज रुक गयीं नाड़ी
झकझोर दिया इस हमले ने
देखें रस्ता घर माँ ठाढ़ी


थी उम्र अभी बचपने की
कुरबानी दे दी सपनों की
वो गया देश रक्षा हित में
आ बाहों में लेटा अपनों की


एक पिता की लाठी टूट गयी
एक माँ ठाढ़ी जो रुठ गयी
बहना की डोली उठने से पहले
उसकी जिंदगी थी छूट गयी


पत्नी अब तक है सदमे में
बच्चे बिलखें सब अपने में
भयभीत कलम मेरी लिखने को
जैसे हुआ है ये सब सपने में


पवन कुमार,
(दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं)